Bhakti Geet : Prasad ha maj dyava deva
अत्मरंगी आपल्या निजरूप दावियेलें
मुमुक्षु जणा साधनामृत पाजियेलें
साधका नित्य पठणे मिळे दिव्यस्मुर्ती
नमस्कार त्या सद्गुरू श्री राममूर्ती
सद्गुरू नाथ महाराज कि जय ||
जय जय रघुवीर समर्थ ||
जय जय सद्गुरू समर्थ ||
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
सहवास तुझाची घडावा देवा
सहवास तुझाची घडावा देवा
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
निशिदिनी प्रभूचे नाम स्मरावे |
निशिदिनी प्रभूचे नाम स्मरावे |
विसर तुझा न पडावा देवा |
विसर तुझा न पडावा देवा |
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
ह्र्दय मंदिरी तुआ बैसोनि |
ह्र्दय मंदिरी तुआ बैसोनि |
ज्ञानयोग मज द्यावा देवा |
ज्ञानयोग मज द्यावा देवा |
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
हरिभजनामृत निशिदिनी पाजुनी |
हरिभजनामृत निशिदिनी पाजुनी |
जन्म मृत्यु चुकवावा देवा |
जन्म मृत्यु चुकवावा देवा |
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
आत्मसुखापरी प्रसाद द्यावा |
आत्मसुखापरी प्रसाद द्यावा |
वियोग तव न घडावा देवा |
वियोग तव न घडावा देवा |
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
सहवास तुझाची घडावा देवा |
सहवास तुझाची घडावा देवा |
प्रसाद हा मज द्यावा देवा | प्रसाद हा मज द्यावा ||
सद्गुरू नाथ महाराज कि जय ||
जय जय रघुवीर समर्थ ||
जय जय सद्गुरू समर्थ ||
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